आँगनवाड़ी सहायिका की दुविधाजनक स्तिथि
By Premchand , 25 Oct 2018

आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं  के वेतन को बढ़ाने का महत्त्वपूर्ण कदम भारत सरकार ने हाल ही में उठाया है | लेकिन पोषण सेवाओं को अन्य और कारण प्रभावित करते हैं  | इसमें से काम का बोझ एक है और जिसमें  स्तिथि कुछ ख़ास अच्छी नहीं है |

आँगनवाड़ी देश में लाखों बच्चों और माताओं के नाज़ुक दौर में सेवाएं प्रदान करती हैं | बिहार राज्य मे सामेकित बाल विकास सेवाओं के तहत 6 सुविधाएं दी जाती हैं: पूरक पोषण, पूर्व स्कूल गैर औपचारिक शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा, प्रतिरक्षा, स्वास्थ्य जांच और रेफ़रल सेवाएं | आँगनवाड़ी केंद्र में एक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और एक आँगनवाड़ी सहायिका होती है | वैसे तो आँगनवाड़ी को बहुत सारे काम करने पड़ते है लेकिन कार्यकर्ता को  36 प्रकार के रेजिस्टर भरने होते है जिसमे की 12 रेजिस्टर पर हर रोज लिखना पड़ता है | इसीलिए आँगनवाड़ी कार्यकर्ता कागजों मे उलझी रहती हैंऔर उनके कुछ कामों का भार आंगनवाड़ी सहायिका के ऊपर आ जाता है |

में आपको बिहार राज्य के पुर्णिया जिले के एक आंगनवाड़ी केंद्र के बारे में बताना चाहता हूँ जहां मैंने देखा की आगंवाड़ी कार्यकर्ता अपने कागजो को पूरा करने मे व्यस्त थीं | आँगनवाड़ी सहायिका बहुत सारे काम कर रही थीं जैसे बच्चों को खाना देना, किसी-किसी बच्चे को खाना खिलाना | बीच–बीच मे आगंवाड़ी कार्यकर्ता कुछ अलग काम करने को बोल देती जैसे की किसी लाभार्थी को घर से बुलाना है तो आंगनवाड़ी सहायिका को जाना पड़ता | ऐसे में बच्चों की देख भाल और बाकी कामों के बीच का संतुलन बिगड़ जाता |  

आँगनवाड़ी सहायिका का मुख्य काम है 3-6 वर्ष के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र पर घर से लाना और उनके लिए गर्म भोजन पकाकर खिलाना | आँगनवाड़ी सहायिका स्थानीय होती हैं | इनका चयन पंचायत स्तर पर मुखिया और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के द्वारा किया जाता है | आँगनवाड़ी सहायिका की योग्यता बहुत ही निम्न होती है और अधिकतर आँगनवाड़ी सहायिका पढ़ी लिखी नहीं होती हैं |

जब मैंने आँगनवाड़ी सहायिका से बात की तो पता चला की जब उनका इस पद के लिए चयन हुआ था तब सिर्फ एक बार प्रशिक्षण हुआ था | आज इनका 12वां साल है काम करते हुए ,बीच – बीच मे पोषण संबंधी क्या बदलाव हुए हैं इसकी उन्हें कोई जानकारी नही है | जैसे – जैसे आँगनवाड़ी कार्यकर्ता का निर्देश होता है वैसे – वैसे काम करती हैं | यह भी एक समस्या है की सहायिकाओं को कोई ज़्यादा नहीं प्रशिक्षण नहीं मिलता | यह तब जब वह सेवा को लाभार्थी तक पहुचाने की एक मुख्य कड़ी हैं | अगर उनको बच्चों के पोषण के बारे में ज़्यादा पता ही नहीं तोह वह बच्चों की देख-रेख कैसे कर पाएंगी, उनमें से कुछ बच्चे तोह गंभीर रूप से कुपोषित होते हैं!

काम का भार और प्रशिक्षण - इन मुद्दों के ऊपर ध्यान देना अब आव्यशक है जिससे ज़मीनी स्तर पर सेवा मे सुधार किया जा सके और सामेकित बाल विकास सेवाएँ का उधेशय पूरा हो |


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