2017 में Accountability Initiative
By Accountability India Staff, 07 Feb 2018

एक नये साल के शुरुआत में आपका स्वागत है! इससे पहले कि 2018 पूरे जोश व उल्लास के साथ शुरू हो जाये, हम आपको 2017 में अपनी गतिविधियों से परिचित कराना चाहते  हैं। इस वर्ष की मुख्य उपलब्धि यह है कि ए.आई. ने बढ़ चढ़ कर ज़मीनी स्तर पर शासन व्यवस्था में अपना योगदान दिया। महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं के नीति निर्माताओं, पत्रकारों और ज़मीनी स्तर पर कार्य करने वाले अधिकारी – सब से हमने कदम से कदम मिलाकर जरूरी मुद्दों पर वार्तालाप की । आपके समर्थन के साथ, हम नए साल में भी इस तरह का संवाद जारी रखने कि आशा रखते हैं ताकि  शासन-प्रणाली को जवाबदेह बनाने वाली आवाज़ को अपनी आवाज़ के माध्यम से और सशक्त बना सकें!

जनवरी

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बजट विश्लेषण 2017

हमारा सालाना प्रकाशित बजट ब्रीफ भारत के केंद्रीय बजट पर विश्लेषण के प्रतीक्षित स्रोत के रूप में उभरा है। 2017 में, हमने सर्व शिक्षा अभियान (एस.एस.ए), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एन.एच.एम), स्वच्छ भारत मिशन (एस.बी.एम) और प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना (पी.एम.जी.एस.वाई) सहित 7 प्रमुख सामाजिक क्षेत्रों  की योजनाओं के धन आवंटन, व्यय और प्रगति का अध्ययन किया। वर्तमान में सरकार इस समय पर सीधा लाभ हस्तांतरण (डी.बी.टी.) और जे.ए.एम. (जनधन, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी) पर फोकस कर रही है।  इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस ब्रीफ में जन-धन योजना, आधार और मोबाईल कनेक्टिविटी योजना के क्रियान्वन और चुनौतियों का विश्लेषण भी किया गया | आप यहां से पूर्ण जानकारी अंग्रेजी में प्राप्त कर सकते हैं।

फरवरी

मीडिया के समक्ष बजट विश्लेषण के ज़रिये प्रस्तुत करना

बजट दस्तावेजों कि व्याख्या करना एक कठिन काम है। हमने पिछले 9 सालों के बजट दस्तावेजों की समीक्षा एवं सीखों का विश्लेषण पत्रकारों के साथ सांझा किया है। ऐसा करने से पत्रकारों को बजट दस्तावेज समझने में आसानी हुई व उनके पाठकों के लिए भी सरल व्याख्यान हो पाया। आप यहाँ से कुछ महत्वपूर्ण तत्वों को स्वयं सीख सकते हैं।

मार्च


 नए रूप में पैसा एसोसिएट

ए. आई. का प्रमुख पैसा सर्वेक्षण कल्याणकारी योजनाओं के खर्चों एवं निधि प्रवाह को देखता है। यह भारत का सबसे बड़ा खर्च से सम्बंधित नागरिक भागीदारी सर्वे है। 5 राज्यों में स्थित हमारे पैसा एसोसिएट्स ज़मीनी स्तर पर इस प्रयास को सफ़ल बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में काम करने और फील्ड में कार्य करने वाले एक पैसा एसोसिएट के अनुभव को गहराई से जानने के लिए यहाँ पढ़े

अप्रैल


उदयपुर, राज्यस्थान में स्वच्छ भारत मिशन के चुनौतियों की पहचान

उदयपुर में स्थानीय प्रशासन के अनुरोध पर ए.आई. द्वारा सर्वेक्षण की शुरुआत हुई। यह सर्वेक्षण ग्राम पंचायत को खुले में शौच मुक्त घोषित करने और स्वच्छ भारत मिशन के ग्रामीण स्तंभ के कार्यान्वयन में चुनौतियों को समझने की कोशिश में किया गया था। तीन महीने के अध्ययन से ग्राम पंचायत को खुले में शौच मुक्त करने के लिए एस.बी.एम. अधिकारियों के कामकाज पर अंतर्दृष्टि मिली और अध्ययन के बाद इसे प्रशासन के साथ साझा किया गया। अध्ययन निष्कर्षों की एक रिपोर्ट 2018 में उपलब्ध होगी। 

मई


बिहार और उत्तर प्रदेश में परिवार नियोजन के प्रशासनिक ढाँचे  को समझना

2012 में भारत ने एफ.पी. 2020 पर हस्ताक्षर किया, जोकि परिवार नियोजन (एफ.पी.) के आवंटन बढ़ाने और गुणवत्ता वाली परिवार नियोजन सेवाओं के दायरे के पहुंच को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध था। एफ.पी. गतिविधियों पर आवंटन, रिलीज़, व्यय की प्रक्रिया, एवं यह समझने के लिए कि क्या परिवार नियोजन 2020 लक्ष्य से तालमेल में है, एक अध्ययन किया गया। यह अध्ययन जनसंख्या फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पी.एफ.आई.) द्वारा नियुक्त की गयी। 2 फोकस राज्यों बिहार और उत्तर प्रदेश के सभी स्तरों पर अधिकारियों के साथ 68 विस्तृत गुणात्मक साक्षात्कार किये गए। इस पर लेख कुछ महीनों में उपलब्ध होगा।

जून

भारत में वित्तीय स्वतंत्रता पर विश्लेषण

भारत में केद्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय हस्तांतरण की जटिलता से कुछ ही लोग परिचित हैं। स्वास्थ्य के दायरे में वित्तीय हस्तांतरण को लेकर पिछले प्रयासों व सबूतों का विश्लेषण करते हुए इस महीने एक पेपर उपलब्ध किया गया। यह ए.आई. और सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट का संयुक्त प्रयास था और इस पेपर ने काफी ध्यान आकर्षित किया। इसे यहां से डाउनलोड किया जा सकता है।

जुलाई

नागरिकों और नौकरशाही के बीच कि दूरी को घटाना

बुनियादी अनिवार्य चीज़ें, जैसे स्कूल में पानी और आधार से सम्बंधित एक ब्लॉग श्रृंखला लिखी गई। इसमें नौकरशाही एवं सरकार की प्रणालियों से संपर्क से सम्बंधित आम नागरिकों के अनुभवों की कहानियां प्रस्तुत की गई। अधिक जानकारी के लिए इस श्रृंखला का सार यहाँ पर पढ़िए

अगस्त


शिक्षा के क्षेत्र में जवाबदेही के लिए  डाटा

यूनेस्को कमीशन एक अध्ययन किया गया जिसके तहत प्राथमिक शिक्षा में योजना बनाने, मानिटरिंग और जवाबदेही कि मांग को लेकर के क्रियान्वयन में डाटा के उपयोग के बारे में जांच की गई। इस को लेकर ए.आई. द्वारा फील्ड सर्वे किया गया। यह अध्ययन हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में आयोजित हुआ, यह समझने के लिए कि सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिक्षित करने के लिए स्कूल स्तर के डाटा का उपयोग किस तरह से हो रहा है। यह अध्ययन इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि अभिभावक, शिक्षक और स्कूल प्रबंधन समिति (एस.एम.सी.) सार्वजिनक रूप से स्कूल स्तर के आंकड़ों का उपयोग जवाबदेही के मांग के लिए कर सकते हैं| इस अध्ययन कि रिपोर्ट 2018 के मध्य तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो जायेगी।

सितम्बर

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अगली पीढी के नीतिकारों को दक्ष बनाना

ए.आई. विशेषज्ञों ने Indian School of Development Management (आई.एस.डी.एम.) के छात्रों के साथ राज्य की क्षमता पर समझ बनाने के लिए चर्चा हुई। इस नए तरह के कोर्स में प्रशासनिक ढांचों को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, शासन-प्रणाली  के असफ़ल होने के क्या कारण रहते है, और इस तरह की लोक नीतियों के निर्माण का शोध करना जिससे कि इन कमियों को दूर किया जा सके, इन सब पर जानकारी उपलब्ध कराई गई।

आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी वर्ग के लिए शिक्षा पर अंतदृष्टि

शिक्षा का अधिकार कानून के अनुसार निजी स्कूल जो सरकार से सहायता राशि प्राप्त नही करते है, उन स्कूलों  में 25% सीटें आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग और वंचित वर्ग  के बच्चों के लिए आरक्षित है। ए. आई. ने इस मुद्दे को बेहतर समझने में योगदान दिया। ए. आई. रिपोर्ट “स्टेट आफ दी नेशन : आर टी ई सेक्शन 12(1) (c) ‘State of the Nation: RTE Section 12(1)(c)’ इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट अहमदाबाद, सेंटर फार पालिसी रिसर्च और सेंट्रल स्क्वेयर फाउंडेशन का संयुक्त प्रयास है। आप इसको यहा पढ़ सकते हैं।

अक्टूबर


दिल्ली के पब्लिक स्कूल के शिक्षकों के दृष्टिकोण को समझना

दिल्ली सार्वजनिक स्कूलों में शिक्षा को लेकर एक नया अध्ययन दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुरोध पर शुरू किया गया। इस अध्ययन में यह समझने कि कोशिश की गई कि विद्यालयों के विभिन्न गतिविधियों में अध्यापक द्वारा अपने समय का वितरण कैसे करते है, शिक्षक द्वारा किये जाने वाला प्रशासनिक कार्य क्या शिक्षण को दिए जाने वाले समय को प्रभावित करता है, शिक्षण के लिए जो समय निर्धारित है उस समय पर शिक्षको का विद्यालय से सम्बंधित काम में व्यस्त होना आदि। शिक्षक वास्तविक रूप से सीखने और सिखाने से सम्बंधित विचार के बारे में यहाँ पर ब्लॉग पढ़ें

बिहार कि स्कूल प्रबंधन समितियों (एस.एम.सी.) में वित्तीय प्रबंधन की चुनौतियां

ए.आई. ने फील्ड स्तर पर राज्य के पूर्णिया और नालंदा जिलों में स्कूल प्रबंधन समिति के द्वारा वित्त के रखरखाव पर सर्वेक्षण का आयोजन किया। अध्ययन के एक हिस्से के रूप में, हमने जांचा कि सर्व शिक्षा अभियान से प्राप्त अनुदान और राज्य द्वारा संचालित योजना के रिकॉर्ड पासबुक-कैशबुक में मेन्टेन करने में क्या समस्याएँ आती हैं। दो योजनाओं में डी.बी.टी. के क्रियान्वयन की प्रक्रिया का अध्ययन भी किया गया। इस सर्वे के लिए लगभग 590 घर और 1000 ग्रामीण प्राथमिक विद्यालयों के वर्तमान छात्रों को अध्ययन में शामिल किया गया था। इस निष्कर्ष को एस.एस.ए. के प्रमुख अधिकारियों को प्रस्तुत किया गया और उन्होंने भी इसके परिणाम को स्वीकार किया है।

साक्ष्य आधारित निर्णय

हाल ही में आई. सी. डी. एम. विकास व्यवसायीओं के साथ वर्कशाप का आयोजन किया गया जिसमे अनुसन्धान पर अपनी समझ को बढाने और किस तरह से उसे लागू किया जाए, इस विषय पर रोशिनी डाली गई। शोध एक ऐसा महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके द्वारा नीति निर्माण करने वाले अन्य हितधारक नीतियों की पहचान कर सकते हैं और उनको सुधारने के लिए चिंतन कर सकते हैं। साक्ष्य-आधारित नीतियों को वास्तविकता बनाने के लिए क्या किया जा सकता है, इस मुद्दे पर 2 मिनट के लिए अपनी दृष्टि यहाँ डालिए

जवाबदेही के आन्दोलन को मज़बूत बनाना

ए.आई. ने नेशनल कैम्पन फार पीपल्स राईट टू इनफार्मेशन (एन. सी. पी. आर. आई.) के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया। ए.आई. विशेषज्ञों ने शिक्षा के अधिकार कानून के क्रियान्वयन, जवाबदेही और पारदर्शिता पर प्रकाश डाला। यहाँ जानिये किस तरह कोई आम व्यक्ति आर.टी.आई. का उपयोग करके प्रशासन को और अधिक जवाबदेह बना सकता है।

दिसम्बर

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स्थानीय शासन के रूप को बदलना

हमारे फील्ड पैसा एसोसिएट्स ने  ट्रेनर के रूप में पहली बार हिंदी में तैयार किये नए पैसा कोर्स “हम और हमारी सरकार” को ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच में का विषय बनाया । यह कोर्स राज्य की क्षमता का विश्लेषण करता है, खास तौर पर स्थानीय सरकार के काम करने के तरीके के बारे में। इस पैसा कोर्स को दो जगह पर पायलट किया गया था। पहला पायलट राजस्थान में नेहरु युवा केंद्र के ब्लॉक समन्वयकों के साथ किया गया, और दूसरा बिहार में जिला स्तर पर प्रथम संस्था के समन्वयकों के साथ किया गया।

स्वच्छता के लिए सामुदायिक ज़रिये तलाशना

सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में ए.आई. और स्केलिंग सिटी इंस्टीट्यूशन्स ऑफ़ इंडिया टीम द्वारा एक सम्मेलन का आयोजन किया गया  जिसमें स्वच्छता के क्षेत्र में अध्ययन कर रहे प्रमुख शिक्षाविदों और नीति शोधकर्ताओं को एक साथ लाया गया। यह सम्मेलन सुरक्षित स्वच्छता के मुद्दों पर और स्वच्छता नीतियों के क्रियान्वयन पर केन्द्रित था। यह चर्चा एस.बी.एम. की भूमिका तक ही सीमित नहीं थी। पिछले तीन वर्षो में एस.बी.एम.-ग्रामीण में कितना विकास हुआ है इसको जानने के लिए यहाँ क्लिक करें। सम्मेलन की रिपोर्ट यहाँ उपलब्ध है।

मेघालय में सामाजिक ऑडिट

इस वर्ष का अंत शासन में जनता की बढ़ती भागीदारी के साथ हुआ।  मेघालय राज्य सामाजिक सेवाओं  पर ऑडिट कानून पारित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया। सामाजिक ऑडिट पर राष्ट्रीय कन्वेंशन में भाग लेने के लिए मेघालय सरकार ने ए.आई. को आमंत्रित किया। इस कन्वेंशन का उद्देश्य शोधकर्ताओं, कार्यकर्ताओं, CAG और केंद्रीय मंत्रालय के सदस्यों एवं पत्रकारों से सुझाव प्राप्त करना था ताकि इस प्रक्रिया को और मज़बूत बनाया जा सके।