मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा की जमीनी हकीकत
16 October 2014
दिनेश कुमार
बच्चों के मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की अनुसार बिहार सरकार के समस्त राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय में(मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली 2010 के तहत) बच्चों को निशुल्क शिक्षा का प्रवाधान किया गया है | इस अधिनियम को लागू हुए पुरे 4 वर्ष हो चुके हैं | सरकार ने अच्छा कानून तो लाया पर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयांन कर रहा है |
विद्यालय भ्रमण करने के दौरान पता चला कि सरकारी विद्यालय के शिक्षक सब कुछ मुफ्त में नहीं देते हैं | आज भी बहुत सारे सरकारी विद्यालय में नमांकन के लिए , विद्यालय से विद्यालय त्याग प्रमाण पत्र (TC) और पाठ्य पुस्तक प्राप्त करने के लिए पैसा देना पड़ता है |
अक्सर जब मैं विद्यालय में अनुश्रवण सह अनुसमर्थन के लिय गया तो बच्चों और अभिभावकों से सुनने को मिला कि नामांकन और TC के लिय प्रधान शिक्षक को पैसा देना पड़ता है | पाठ्य पुस्तक के लिय भी प्रधान शिक्षक द्वारा पैसे की मांग की जाती है | यह राशि विद्यालय विकास के नाम पर ली जाती है | आप इसे किस रूप में देखते हैं – क्या यह सही है ? या रिश्वत है ?
प्रधान शिक्षक-
TC, नामांकन और पाठ्य पुस्तक के लिए ली जाने वाली राशि के बारे में पूछने पर बहुत सारे प्रधान शिक्षक का कहना है कि इसे उपहार के रूप में अभिभावक से लिया जाता है | कुछ शिक्षकों का यहभी कहना है कि ये विद्यालय विकास के नाम पर लिया जा रहा हैं | परन्तु अभिभावक के लिए यह बहुत बड़ी समस्या बन रही है | पाठ्य पुस्तक की बात करे तों प्रखंड से विद्यालय तक पुस्तक लाने के खर्च के नाम पर भी पैसा लिया जा रहा है | सरकार कहती है कि हम बच्चों की प्रारम्भिक शिक्षा मुफ्त एवं निशुल्क मुहैया करवा रहे हैं | पर जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही बयाँ कर रहा है | अभिभावकों को TC और पाठ्य पुस्तकों की प्राप्ती हेतु पैसा देना पड़ रहा है | सबसे बड़ी हैरानी इस बात की है कि यह पैसा विद्यालय विकास के नाम पर वसूला जा रहा है |
शायद इस कारण बहुत सारे बच्चों का विद्यालय में नामांकन, मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून की उपलब्धता के बावजूद भी, नही हो पा रहा है| कितने छात्रों को आगे के पढ़ाई के लिय विद्यालय परित्याग प्रमाण पत्र नही मिल पा रहा है | अभी भी ऐसे बच्चे हैं जिनेक झोले में उनकी कक्षा की पाठ्यपुस्तकें नदारद हैं | क्या यह शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लघंन नहीं है ?
बिहार राज्य के पुर्णिया जिला के दो विद्यालयों का जिक्र मैं यहाँ पर करना चाहता हूँ | पहला, ऐसा विद्यालय जहाँ कुछ अभिभावक पिछले कई दिनों से विद्यालय इसलिय आ रहे थे, क्योंकि उनके बच्चों का विद्यालय परित्याग प्रमाण पत्र प्रधान शिक्षक निर्गत नही कर रहे थे | प्रधान शिक्षक के द्वारा अभिभावकों को इसलिये बैरंग वापस कर दिया जाता था, क्योंकि उनके द्वरा मांगी गयी राशि को अभिभावक नही दे पा रहे थे| प्रधान शिक्षक की बात करें तो उनका कहना था कि हम यह राशि उपहार स्वरूप एवं विद्यालय विकास के लिय से कुछ राशि बच्चों से मांगा रहे थे | मैंने जब उपस्थित अभिभावकों से बात किया तों उनका कहना था, “मास्टर साहब ने कहा है कि कम से कम 50/- रुपया प्रत्येक बच्चा को देना होगा | उन्होंने यह भी कहा कि इसे उपहार स्वरूप समझिए या विद्यालय विकास फंड के लिए| पर पैसा तो देना ही होगा ! यदि आप यह राशि जमा नही करते हैं तो आपके बच्चा का विद्यालय परित्याग प्रमाण पत्र नही मिलेगा और उसका कही नामांकन हो पायेगा |”
प्रधान शिक्षक के कक्ष में बहुत सारे बच्चे एवं अभिभावक उपस्थित थे और उनके चारों तरफ घेरे में खड़े थे | मैंने प्रधनाध्यापक की उपस्थिति में बच्चों से बात-चीत करना शुरू किया तो उनका कहना था कि “प्रधान शिक्षक हमलोगों से 100/- रुपया मांगे थे | परन्तु हमलोग 50/- रुपया प्रति बच्चा के दर से TC के लिऐ देते हैं | तब इसके बाद ही हमलोगों को विद्यालय परित्याग प्रमाण पत्र (TC) दिया जाता है | | वहाँ उपस्थित अभिभावको ने बताया कि, “ हमलोग आज अपना काम-धाम को छोड़कर बच्चों के TC के लिय आये हैं | सरकार कहती है कि विद्यालय में सबकुछ मुफ्त में दिया जाता है लेकिन यहाँ तो बिना पैसा लिए बच्चों का नाम तक नही लिखा जाता है | सरकार झूठ कहती है | गरीबों के लिय विद्यालय में कुछ नही है| किताब -पोथी के लिय भी राशि ली जाती है, उसके भाड़े – किराये के नाम पर |” इस बात चीत के दौरान प्रधान शिक्षक के कक्ष में संबंधित गावँ का शिक्षक भी भी उपस्थित था मगर इस चर्चा एवं आरोप – प्रत्यारोप के दौरान कुछ नही बोला |
दूसरा विद्यालय मैं बात-चीत के दौरान बच्चोंने हमें बाताया कि “राशि जमा करना हमलोग की मजबूरी है क्योंकि – हमारे साथ पढ़ने वाली और लड़कियाँ 100/ रुपये देकर अपना प्रमाण पत्र पहले ही ले जा चुकी हैं | इसलिए हमलोगों को भी राशि जमा करना जरूरी हो गया है नही तों प्रधान शिक्षक हमलोगों को TC नही देंगे |”
प्रधान शिक्षक के अनुसार – TC देने और नामांकन लेने में बच्चों से जो राशि ली जाती है उसका उपयोग विद्यालय विकास में खर्च किया जाता है | इस राशि को खर्च करने के लिय किसी भी प्रकार का लेखा-जोखा नही रखा जाता है | उपस्थति अन्य शिक्षकों ने बाताया कि इस राशि का उपयोग कब किया जाता है इसका उन्हे पता नही है |
ज्ञात हो कि सर्व शिक्षा अभियान और राज्य सरकार की ओर से विद्यालय में विभिन्न तरह की राशि उपलब्ध करायी जाती हैं –
- विद्यालय विकास योजना (प्रथामिक विद्यालय -5000/, मध्य विद्यालय – 12000/)
- विद्यालय रखरखाव हेतु (प्राथमिक विद्यालय – 5000/, मध्य विद्यालय – 10000/)
- शिक्षण अधिगम समाग्री (प्रति शिक्षक 500/ रुपया प्रति वर्ष )
- पाठ्य पुस्तक को विद्यालय तक लाने हेतु राशि(BRC – आकस्मिकता मद्)
- बच्चों के लिए छात्रवृति (कक्षा (I-IV) के छात्राओं को प्रति माह 50/, कक्षा (V-VI) के छात्राओं को प्रतिमाह 100/, कक्षा (VII-X) के सभी छात्राओं को 150/ प्रति माह के दर से)
- बच्चों के लिए पोशाक (कक्षा (I-II) के सभी छात्र-छात्राओं 400/ प्रति वर्ष, कक्षा (III-V) के सभी छात्र-छात्राओं 500/ प्रति वर्ष, कक्षा (VI-VIII) के सभी छात्र-छात्राओं 700/ प्रति वर्ष)
- बच्चों के लिए परिभ्रमण (प्रति विद्यालय 10000)
- मध्याहन भोजन के अलावे अन्य सुविधायें |
शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE) जरुर लागू हआ है ओर इसकी उपलब्धि भी दिख रही है | परन्तु सभी जगह यह कितना प्रभावशाली है इसमे थोड़ा संदेह है | किसी –किसी विद्यालय की जमीनी हकीकत इसके नियमों एवं प्रावधानों की खुली धज्जियाँ उड़ा रही हैं | RTE कों प्रभाव शाली बनाने के लिए जरूरत है कि इसके प्रति लोगों कों जागरूक किया जाए, विद्यालय में समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, विद्यालय में संचालित गतिविधियों का लगातार निष्पक्ष अनुश्रवण सह अनुसमर्थन किया जाए | नियम के विरुद्ध काम करने वाले व्यक्तियों के ऊपर जांचोपरांत कार्यवाही की जाए एवं साथ ही साथ अच्छे प्रदर्शन करने वाले विद्यालय एव कर्मियों को पुरस्कृत किया जाए | अगर उपर्युक्त विन्दुओं पर विशेष गौर किया जाए तो इस अधिनियम का ओर सकारात्मक प्रभाव देखने कों मिलेगा | विशेष कर हमारे शिक्षक समुदाय को, जिन्हें इसे कानून को जमीनी स्तर पर लागू करना होता है | साथ ही सरकार को गहरी अनुश्रवण की जरुरत है | तब जाकर हम वैसे समुदाय जो आज भी शिक्षा से दूर है उन्हें शिक्षा की रोशनी दे सके |



