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जवाबदेही के मायने

Indresh Sharma

18 September 2019

किसी भी व्यक्ति को अपने कार्यक्षेत्र में दायित्वों को सफलतापूर्वक निष्पादन हेतु कुछ अधिकार सौंपे जाते हैं। इन अधिकारों व शक्तियों का प्रयोग करने में वह पूर्णतया स्वतन्त्र नहीं होता बल्कि उसे सौंपने वाली सत्ता अथवा कार्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी होती है, इसे ही जवाबदेही कहते हैं| यदि कार्यों एवं दायित्वों का निर्वाहन सही से समय पर न हो पाए तो ऐसे में सवाल पूछे जाने लाज़मी हैं|

क्या कभी हमने अपनी सरकार से यह सवाल किया है कि जब हम अपना टैक्स समय पर आपको देते हैं तथा वोट देकर आपको चुनते हैं तो बावजूद इसके क्यों हमें गुणवत्तापूर्ण सेवाएं समय पर नहीं मिलती? जब सरकार को भी मालुम है कि कुछ मूलभूत सेवाएं नागरिकों का मौलिक अधिकार है तो फिर क्यों आज भी हमारे लिए बेहतर सेवाएं मिलना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है?

एक लोकतांत्रिक देश के नागरिक होने के नाते जवाबदेही हम-आप सभी के जीवन का एक अहम हिस्सा है जिसके तहत हम सभी जब इस शब्द के महत्व का सही अर्थ जान पाते हैं, तो एक बेहतर माहौल बनता है| ऐसा नहीं है कि हमेशा जवाबदेही अपने से उच्च व्यक्तियों, सरकारों तथा संस्थाओं के प्रति ही हो, बल्कि जवाबदेही दोनों तरफ होनी चाहिए| एक नागरिक होने के नाते हमारी भी समाज के प्रति अनेकों तरह से जवाबदेही बनती है|

हम अकाउंटबिलिटी इनिशिएटिव, एक रिसर्च समूह के तौर पर सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च संस्था के अंतर्गत वर्ष 2008 से शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं ताकि शासन, नागरिक आवश्यकता के प्रति उत्तरदायी हो| हमारा मानना है कि जब लोग सशक्त होंगे, सेवा प्रदाता उत्तरदायी होंगे और नीति निर्माता जागरूक होंगे, तभी जवाबदेही के लिए उचित वातावरण बन पायेगा। हमारा मुख्य उद्देश्य कुशल सार्वजनिक सेवाओं के कार्यान्वयन में आने वाली कठिनाइयों को पहचाननाऔर उनका विश्लेषण करके नीति निर्माताओं, सेवा प्रदाताओं और नागरिकों के सामने लाना है। हम अलग-अलग तरह से अध्ययन करते हैं जिसमें मुख्य रूप इस प्रकार हैं:

  1. हम सरकार की योजनाओं की ज़मीनी हक़ीकत जानने के लिए स्वयंसेवकों के साथ मिलकर सेवा प्रदाताओं से वास्तविक जानकारी इकठ्ठा करते हैं जैसे शिक्षा संबंधी जानकारी हेतु स्कूल तथा पोषण की स्थिति समझने के लिए आंगनवाड़ी केन्द्रों तथा लाभार्थियों से सीधे मुख़ातिब होते हैं| इसके अलावा वास्तविकता को और गहराई से समझने के लिए हम सरकार का भी पक्ष जानने हेतु सम्बंधित अधिकारियों के साथ विस्तृत साक्षात्कार करते हैं| इस तरह हम शासन में प्लानिंग, बजट, निधि प्रवाह तथा प्रशासनिक ढांचे का अध्ययन करते हुए सरकार की नीतियों की वास्तविकता का अध्ययन करते हैं| इसे हम पैसा सर्वेक्षण कहते हैं|
  2. इसके अलावा प्रति वर्ष भारत सरकार अलग-अलग क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए बजट पेश करती है जिसका सीधा सारोकार हम-आप की ज़िन्दगी से जुड़ा होता है| एक रिसर्च समूह होने के नाते हम वार्षिक तौर पर सरकार की प्रमुख केन्द्रीय प्रायोजित योजनाओं के आवंटन, खर्च तथा उनसे होने वाले जमीनी परिणामों का विश्लेषण करते हैं| योजनायें, जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, समग्र शिक्षा सहित अन्य कई योजनाओं का आकलन करके एक पूरा दस्तावेज तैयार करते हैं| इस दस्तावेज को बजट ब्रीफ कहा जाता है जिसे सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर ही तैयार किया जाता है|

इस दस्तावेज के तथ्यों को हमारी संस्था इस तरह से सरल करने की कोशिश करती है ताकि ज्यादा से ज्यादा नागरिक आंकड़ों के पीछे छुपी हक़ीकत को आसानी से समझ पाएं| बजट ब्रीफ एक पारदर्शी तथा जवाबदेही उपकरण के तौर पर तैयार किया जाता है, ताकि नागरिक सेवा प्रदाताओं से जवाब मांग सकें|

एक ज़िम्मेदार समूह होने के नाते हम पैसा सर्वेक्षण एवं बजट ब्रीफ दस्तावेज के परिणामों को अपने हितधारकों जैसे सामाजिक क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं, मिडिया, अधिकारीयों एवं नागरिकों तक यह जानकारियां विभिन्न माध्यमों से पहुंचाने का प्रयास करते हैं| हम सभी सांसदों के साथ भी अपनी रिसर्च साझा करते हैं ताकि इस सबसे एक बेहतर चर्चा और जवाबदेही का माहौल बने तथा जहाँ पर संभव हो आवश्यक कदम उठाये जाएँ|

हमारा मानना है कि सरकार को सेवाएं बेहतर एवं समय पर पहुंचाने के लिए कुछ ठोस उपाय करने होंगे जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा| हमारे अध्ययनों में हमने पाया है कि जमीनी स्तर पर सेवायें देने वाले अधिकारीयों को जरुरत के अनुसार उनकी क्षमता निर्माण नहीं हो पाती| अतः सरकार को एक ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए जहाँ नियमित तौर पर इन अधिकारीयों की क्षमता को बढ़ाया जाए ताकि वे नागरिकों को बेहतर से बेहतर सेवाएं दे पाने में सक्षम हों| चाहे स्वास्थ्य हो, शिक्षा हो या अन्य कोई सेवा, सरकार को अपने प्रशासनिक एवं वित्तीय ढांचे में ऐसे जवाबदेही के संस्थागत तरीके स्थापित करने होंगे जहाँ नागरिकों को उनकी आवश्यकताओं को देखते हुए समय पर बेहतर सेवाएं मिले| तरीके ऐसे हों, जिससे नागरिक बेहतर सेवाएं न मिलने की स्थिति में जवाबदेही की मांग कर पाएं| सरकार को पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए पारदर्शी सूचना प्रणाली (MIS) सिस्टम ज्यादा से ज्यादा सार्वजनिक करना चाहिए ताकि प्रत्येक नागरिक जान सके की सरकार किस तरह अपना प्रदर्शन कर रही है|

शुरुआत में हमारे सामने यह चुनौती रहती थी कि आखिर इतने वर्षों से इकठ्ठा इन उपयोगी जानकारियों एवं सबूतों को हम कैसे ज्यादा से ज्यादा नागरिकों तक सरल भाषा में पहुँचायें| अतः इसी सोच के साथ हमने अपनी रिसर्च द्वारा एकत्रित किये गए आंकड़ों, जमीनी हकीकतों, संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए इसे एक कोर्स की शकल दी है| ‘हम और हमारी सरकार’ कोर्स इसी सोच का नतीजा है| इस कोर्स के प्रतिभागी मुख्य रूप से विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रही संस्थाएं, पंचायत अधिकारी, प्रतिनिधि तथा छात्र समूह हैं| इस कोर्स में हम मूल रूप से त्री-स्तरीय सरकार के अंतर्गत प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्था के बारे में बताते हुए उन जटिलताओं को सामने लाने का प्रयत्न करते हैं, जिनकी वजह से हम-आप तक सेवाएं समय पर नहीं पहुँच पाती| कोर्स के माध्यम से हम बताते हैं कि आखिर एक नागरिक होने के नाते हम-आप कैसे शासन की बारीकियों को समझते हुए सरकार के साथ जुड़कर बेहतर सेवा वितरण में अपनी अहम् भूमिका निभा सकते हैं|

अतः मुझे लगता है कि जिस तरह से अकाउंटबिलिटी इनिशिएटिव रिसर्च समूह विभिन्न माध्यमों के द्वारा सरकार को जमीनी वास्तविकता पहुंचाने तथा नागरिकों को जागरूक करने का काम कर रहा है, उससे आज भले ही छोटे स्तर पर सही, पर भविष्य में निश्चित रूप से शासन और जवाबदेही पर चर्चा का एक व्यापक माहौल बन पायेगा|

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